Sunday, 8 August 2021

ऊपर वाला झूठ न बुलवाए

"ऊपर वाला झूठ न बुलवाए...."

हमारी सरकार के शाबाशी मिलना चाहिए वो गरीब का कितना ध्यान रखती है, सारी योजनाएं और फंड वितरण के लिए जब प्रशासनिक अमला कम पड़ जाता है। तब पार्टी के कार्यकर्ताओं से इस काम में सहयोग लिया जाता है। वो इस काम में हाथ बंटाने में माहिर होते हैं। परंतु न जाने क्यों इस बार अन्न उत्सव में अन्नदाता गायब मिला।‌ अन्न उगाने वाला अन्न दाता खुद के लिए निःशुल्क कुछ भी नहीं पाता, खाद बीज से लेकर पानी तक में कर देना पड़ता है। लेकिन अन्न की खुशकिस्मती थी कि मंडियों में सड़ने से पहले ही लोगों के घरों में सही सलामत पहुंच गया वो महोत्सव के साथ। वैसे तो अन्न वितरण उचित मूल्य की दुकान में बिना मूल्य चुकाए गालियां खिलाकर दिया जाता ही था पर इस बार तो हमारा ही तंबू हमारे ऊपर गाड़ कर, नेताओं मंत्रियों के कर कमलों से कमल लगी पचीस किलो की कट्टी में सम्मान दिया गया।
इस बार हमारे पड़ोस  काकू बहुत खुश थे कि अच्छा पांच महीने का अनाज मिल गया, फोटो खिंचवाए वो अलग से, उनको अब न कमाने टेंशन, न खाने का टेंशन, न गल्ले का टेंशन, पर गैस सिलेंडर भराने का टेंशन है, फ्री में डेढ़ पाव दारू की टेंशन है। वो तो रोज मनाते हैं कि  हर महीने सिलेंडर भी मुफ्त में मिल जाए। रोज शाम को सरकारी शराब की दुकान से बीपीएल का कार्ड दिखाकर एक गिलास देशी मिल जाए तो रात का मजा ही आ जाए। पर सरकार है कि सुनती ही नहीं। मनरेगा से नरेगा तक के कार्ड से आमदनी हो रही, आवास से झोपड़ियां मकान में बदल गई, एक बल्ब कनेक्शन जिंदाबाद। बस ठेके में लाइन
हमारे सामने उचित मूल्य की दुकान में कल जलसा था। आसपास की साफ सफाई, नालियों और कीचड़ में ब्लीचिंग छिड़काव था ताकि बदबू न आ सके। टोफू गाड़ कर मंत्री जी के आने का इंतजार कर रहे थे। अन्न देने वाले और लेने वाले भी। वितरण के समय दिन भर भूखे-प्यासे सच्चे गरीबों के बीच में कुछ मोटर गाड़ी और बाइक वाले नकली गरीब भी पहुंच गए, अनाज लेने धक्का मुक्की कर सबसे आगे लग गाए। मैंने सोचा सही समय पर सही लोग अनाज ले रहे हैं।
ये लोग भी सच्चे वोटर हैं, काम के न मुफ्त का गल्ला उठाने आते हैं। हर महीने यही परंपरा का निर्वाह होता रहता है और तो और गरीबी का मुखौटा ओढ़े आज कल के गरीब भी इसी बहती गंगा में हाथ धो लेते हैं। वैसे काकू ने गलत नहीं कहा रोज की दारू भी सरकार देने लगे तो काम धाम से परमानेंट रिटायरमेंट मिल जाए। काकू ने हमें तो बिना सरकारी कार्ड और सरकारी कार्ड वाले का अंतर समझा दिया।
हमारी सरकार कितनी अच्छी है, इस तरह मुफ्त में सब कुछ देकर सब को अलाली का गुर सिखा रही है। वोट देने का सही रिटर्न गिफ्ट मिल रहा है। अब तो चारों ओर कमल ही खिलना चाहिए।
अब प्रधानमंत्री जी ने यह कह दिया है कि मध्यप्रदेश बीमारू राज्य नहीं है तो मानना ही पड़ेगा, वो भी बिना किसी संदेह के। हमारे यहां करोड़ों का बाईपास टूटने लगा कुछ ही दिन पहले लोकार्पण करके गए थे सांसद जी, कई शहरों में पुल के पुल टूट गए, व्यापम  पात्र शिक्षक नौकरी के इंतजार में स्कूलों के सपने देख रहे हैं। कोरोना की बीमारी से बीमार मध्य प्रदेश एक ही उत्सव में स्वस्थ हो गया। हमारे राज्य में कितना तेज है रिकवरी रेट।
काश हम प्राइवेट कर्मचारियों की भी कुछ ऐसी जुगत भिड़ जाए कि आधे वेतन में पूरा काम करने के दिन से राहत मिल जाए। पर कोई बात नहीं हम तो इसी बात में खुश हो लेंगे कि यदि सरकार इसी तरह किसानों को कुछ सरकारी जमीन मुफ्त में दे दे, बीज और खाद भी हर फसल के लिए वितरित करके फोटो खिंचवाए तो खेती किसानी का करने वाले किसानों का भी फायदा हो। भाई जो अनाज उगा रहा है उसे भी यह निशुल्क वितरण का हक मिलना चाहिए।  भगवान झूठ न बुलवाए, भाई किसानों के लिए निःशुल्क वितरण कब शुरू होगा। हम तो इसी इंतजार में हैं।

अनिल अयान 

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